US-Iran Deal: अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर सहमति, शुक्रवार को हो सकते हैं आधिकारिक हस्ताक्षर

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Us Iran Peace Deal Switzerland Signing June 2026
Us Iran Peace Deal Switzerland Signing June 2026 (PC: BBN24/Social Media)

US-Iran Peace Deal: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव और संघर्ष के बीच बड़ी कूटनीतिक प्रगति सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शांति समझौते के ऐलान के बाद ईरान ने भी समझौते के मसौदे पर सहमति जताई है। दोनों देशों के बीच औपचारिक समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर होने की संभावना है।

ईरान ने समझौते की पुष्टि की

ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) का मसौदा अंतिम रूप ले चुका है। उन्होंने बताया कि इसका औपचारिक हस्ताक्षर समारोह स्विट्जरलैंड में आयोजित किया जाएगा और हस्ताक्षर के बाद समझौते का पूरा पाठ सार्वजनिक किया जा सकता है।

ट्रंप ने किया समझौता पूरा होने का दावा

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता पूरा हो चुका है। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही बहाल करने और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने की भी घोषणा की।

ईरान ने रखीं सख्त शर्तें

हालांकि ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह अमेरिका पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं करेगा। तेहरान का कहना है कि आगे की बातचीत तभी होगी जब अमेरिका अपने वादों को व्यवहार में लागू करेगा। ईरान प्रतिबंधों में राहत, जब्त संपत्तियों की वापसी और सैन्य कार्रवाई पूरी तरह रोकने जैसी शर्तों पर कायम है।

होर्मुज जलडमरूमध्य फिर खुल सकता है

समझौते के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। यह मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। समझौते की खबर के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में भी सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली है।

60 दिनों तक जारी रह सकती है बातचीत

रिपोर्टों के अनुसार, प्रारंभिक समझौते के बाद अगले 60 दिनों तक परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत और अन्य विवादित मुद्दों पर विस्तृत वार्ता जारी रह सकती है। दोनों देशों के बीच स्थायी समझौते का रास्ता इन्हीं वार्ताओं से तय होगा।

मध्य पूर्व में तनाव कम होने की उम्मीद

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है, तो मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी तनाव में कमी आ सकती है। साथ ही वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को भी राहत मिलने की संभावना है।

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