Devkinandan Thakur: भारतीय संस्कृति और परंपराओं में घर की चौखट यानी दहलीज का विशेष महत्व माना गया है। अक्सर बड़े-बुजुर्ग घर की चौखट पर बैठने से मना करते हैं, खासकर शाम के समय। इसके पीछे धार्मिक और वास्तु शास्त्र से जुड़ी कई मान्यताएं बताई जाती हैं।
प्रसिद्ध कथावाचक Devkinandan Thakur के अनुसार, घर की चौखट को भगवान नरसिंह का स्थान माना जाता है। इसलिए इस पवित्र स्थान पर बैठना उचित नहीं माना जाता और इसे अशुभ समझा जाता है।
क्या कहते हैं देवकीनंदन ठाकुर?
देवकीनंदन ठाकुर के अनुसार, दहलीज केवल घर का प्रवेश द्वार नहीं है, बल्कि यह एक पवित्र स्थान भी है। मान्यता है कि भगवान नरसिंह का संबंध इस स्थान से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसका सम्मान करना चाहिए और इस पर बैठने या पैर रखने से बचना चाहिए।
पौराणिक कथा से जुड़ा है महत्व
हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, असुर राजा Hiranyakashipu को ऐसा वरदान मिला था कि उसका वध न घर के अंदर हो सकता था और न बाहर, न दिन में और न रात में, न मनुष्य द्वारा और न पशु द्वारा।
इसके बाद भगवान Narasimha ने नरसिंह अवतार धारण किया और गोधूलि बेला में घर की चौखट पर हिरण्यकशिपु का वध किया। चूंकि चौखट न पूरी तरह घर के अंदर होती है और न बाहर, इसलिए इसे विशेष धार्मिक महत्व प्राप्त हुआ।
वास्तु शास्त्र में क्या कहा गया है?
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर की मुख्य चौखट सकारात्मक ऊर्जा, सुख और समृद्धि के प्रवेश का मार्ग मानी जाती है। मान्यता है कि शाम के समय माता Lakshmi का आगमन इसी मार्ग से होता है।
ऐसे में यदि कोई व्यक्ति दहलीज पर बैठा रहता है, तो इसे शुभ ऊर्जा और समृद्धि के मार्ग में बाधा माना जाता है। इसी कारण वास्तु शास्त्र में भी चौखट पर बैठने से बचने की सलाह दी जाती है।
क्यों नहीं बैठना चाहिए दहलीज पर?
- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह पवित्र स्थान माना जाता है।
- भगवान नरसिंह की कथा से इसका विशेष संबंध बताया जाता है।
- वास्तु शास्त्र में इसे सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश द्वार माना गया है।
- शाम के समय इस स्थान पर बैठना अशुभ माना जाता है।
- घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक वातावरण बनाए रखने के लिए इसका सम्मान करने की सलाह दी जाती है।
हालांकि, ये मान्यताएं धार्मिक और सांस्कृतिक विश्वासों पर आधारित हैं। अलग-अलग परिवारों और परंपराओं में इनके पालन के तरीके भिन्न हो सकते हैं।

