WATCH: स्पेसएक्स स्टारशिप की क्रैश लैंडिंग, हिंद महासागर में धमाके के साथ खत्म हुआ मिशन

Rohit Mehta Journalist
Spacex Starship Crash Landing Indian Ocean Test Flight
Spacex Starship Crash Landing Indian Ocean Test Flight (PC: BBN24/Social Media)

SpaceX Starship Test: SpaceX के विशाल स्टारशिप रॉकेट ने एक बार फिर दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया. टेस्ट फ्लाइट के बाद रॉकेट हिंद महासागर में लैंडिंग की कोशिश के दौरान जोरदार धमाके के साथ खत्म हो गया. हालांकि विशेषज्ञ इसे पूरी तरह असफल नहीं मान रहे, बल्कि भविष्य के मून और मंगल मिशन की दिशा में अहम कदम बता रहे हैं.

टेक्सास से हुई लॉन्चिंग

स्पेसएक्स ने अपने स्टारबेस लॉन्च साइट, टेक्सास से स्टारशिप को सुपर हेवी बूस्टर के साथ लॉन्च किया. यह दुनिया का सबसे शक्तिशाली रॉकेट सिस्टम माना जाता है.

लॉन्च के कुछ समय बाद सुपर हेवी बूस्टर अलग हो गया और स्टारशिप लंबी दूरी तय करते हुए पृथ्वी की कक्षा से आगे हिंद महासागर की दिशा में बढ़ा.

री-एंट्री के दौरान हुआ विस्फोट

करीब एक घंटे की टेस्ट फ्लाइट के दौरान इंजीनियर रॉकेट की री-एंट्री क्षमता, हीट शील्ड और लैंडिंग सिस्टम पर नजर बनाए हुए थे.

पृथ्वी के वातावरण में लौटते समय स्टारशिप ने अत्यधिक गर्मी और दबाव का सामना किया. इसके बाद रॉकेट ने स्पीड कम करने के लिए लैंडिंग बर्न शुरू किया, लेकिन अंतिम क्षणों में वह तेज गति से समुद्र से टकरा गया.

टक्कर इतनी जोरदार थी कि हिंद महासागर में बड़ा विस्फोट दिखाई दिया.

तय क्षेत्र में ही गिरा रॉकेट

हालांकि स्पेसएक्स के लिए राहत की बात यह रही कि स्टारशिप उसी निर्धारित क्षेत्र में गिरा, जिसे पहले से लक्ष्य बनाया गया था. इससे कंपनी को रॉकेट कंट्रोल और नेविगेशन सिस्टम से जुड़ा अहम डेटा मिला है.

विशेषज्ञों का कहना है कि स्टारशिप की सबसे बड़ी चुनौती सुरक्षित री-एंट्री और लैंडिंग है और इस टेस्ट से कंपनी को कई महत्वपूर्ण तकनीकी जानकारियां मिली हैं.

नासा के मून मिशन में भी होगी भूमिका

NASA अपने आगामी आर्टेमिस मिशन में स्टारशिप के संशोधित संस्करण का इस्तेमाल करना चाहता है. इस मिशन का लक्ष्य इंसानों को दोबारा चंद्रमा पर भेजना है.

वहीं Elon Musk का सपना मंगल ग्रह पर मानव बस्ती बसाने का है और स्टारशिप उसी योजना का सबसे अहम हिस्सा माना जाता है.

बार-बार टेस्ट कर सीख रही स्पेसएक्स

स्पेसएक्स की कार्यशैली पारंपरिक अंतरिक्ष एजेंसियों से अलग मानी जाती है. कंपनी लगातार टेस्ट लॉन्च करती है, गलतियों से सीखती है और तेजी से नई तकनीक तैयार करती है.

यही वजह है कि समुद्र में विस्फोट के बावजूद इस मिशन को भविष्य की अंतरिक्ष यात्रा के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है.

Share This Article